_________________________________ पाकिस्तान चले जाओ गीत हमारे प्यारे है, इन गीतों को तुम दोहराओ। देशद्रोही बनने से पहले, दुष्टों थोड़ा तो घबराओ कई मन्नतों के बाद हमें, इक ऐसा नेता हाथ लगा। देश की इज्जत के ख़ातिर, तुम अपने भी कर्तव्य निभाओ। "अच्छे दिन आएंगे" यह पंक्ति तुम बार बार दोहराओ। नाराज़ अगर सरकार से हो तो पाकिस्तान चले जाओ। संविधान की लाज रखी,अभिव्यक्ति की जहाँ छूट मिली। टीवी, पेपर और मीडिया यहाँ बड़ी चिरकूट मिली। जहाँ देखो वहाँ जय जय होती, इक लब्ज़ विपरीत नहीं। जय हो तेरे भक्तों की चाचा, आशा बड़ी अटूट मिली। रोजगार के अवसर है अब ,पकोड़ों को सूची में लाओ। और नाराज़ अगर सरकार से हो तो पाकिस्तान चले जाओ। अच्छे अच्छे नेताओं के थे कार्टून यूँ बनते। किसी की नाक लम्बी होती, किसी के हाथ तनते। पर अपने इन नेता जी की खबर है इतनी अच्छी। भारत का "फेंकू नंबर वन" है , छप्पन के सीने तनते। ये "मन की बात" बता देते है, तुम सुनने को चले आओ। नाराज़ अगर सरकार से हो तो पाकिस्तान चले जाओ। पहली बार...
🌿 असमंजस – जब निर्णय कठिन हो हम सबके जीवन में कुछ पल ऐसे आते हैं जहाँ मन अनेक दिशाओं में भटकता है। निर्णय लेना आसान नहीं होता, और असमंजस की स्थिति हमें बाहरी सुंदरता और भीतरी भ्रम के बीच झुला देती है। इसी मनःस्थिति को गहराई से चित्रित करती है Hariram Regar की यह मार्मिक कविता – "असमंजस" । यह कविता केवल सुंदर शब्दों की माला नहीं है, बल्कि यह संकोच, संशय और आत्मबोध की यात्रा है। आइए पढ़ते हैं यह सुंदर और विचारोत्तेजक काव्य: असमंजस (Confusion) तकते रहोगे बाग को तुम , कब तलक तकते रहोगे ? बीतते पल-पल दिवस, ये फूल मुरझा जायेंगे। मन की इन गहराइयों में प्रश्न अगणित जाल-से । फूल है या भ्रम की छाया पूछते हर डाल से। बीतते पल गीत जैसे, रूठ जायेंगे अगर । निर्णय की इस मौन बेला में चलो अब संगधर । त्याग दो संकोच सारे, संशयों को आज तुम । मन कहे जो सत्य बोले, सुन लो वो अव्यक्त गुण। अब ना तकना शेष हो यह — पथ सुनिश्चित जान लो। जो बसा है चित्त-गहर में, अब उसे ही मान लो। Composed by: Hariram Regar 🧠 कविता का मर्म – असमंजस से आत्म-निर्णय तक इस कविता में बाग प्रतीक है उन आकर्षक ...